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Shri krishna Janmashtami 

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की 

हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की  

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर चारों तरफ उत्साह बना हुआ है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जन्‍मदिन की तैयारियां पूरे देश में चल रही हैं। इस बार श्रीकृष्‍ण की 5248वीं जयंती है।  ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र को आधी रात में ठीक 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। 
ये तिथि इस बार 30 अगस्त को पड़ रही है जिस कारण इसी दिन कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस साल जन्माष्टमी के त्योहार पर हर्षण योग बन रहा है। ज्योतिष अनुसार ये योग शुभ और मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है इस योग में किये जाने वाले कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।  

हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। 

स्मार्त और वैष्णव का भेद  

स्मार्त : वेद,  श्रुति- स्मृति  आदि  ग्रंथो को मानने वाले धर्म परायण प्रायः सभी गृहस्थी लोग स्मार्त कहलाते हैं।  

वैष्णव :  वे धर्म परायण लोग जिन्होंने किसी प्रतिष्ठित वैष्णव सम्प्रदाय के गुरु से दीक्षा ग्रहण की हो, गले में श्री गुरु द्वारा दी गई कंठी धारण की गई हो तथा मस्तक एवं गले पर श्री खंड, चंदन या विष्णु चरण का तिलक, त्रिपुण्ड, आदि के चिन्ह धारण किए हुए एवं विशिष्ट संप्रदाय से सम्बंधित 
भक्तजन वैष्णव कहलाते हैं।  

जन्माष्टमी समय 

पूजा का समय – 11:59 PM से 12:44 AM 31 अगस्त तक
अवधि – 45 मिनट
पारण समय – 12:44 AM, अगस्त 31 के बाद
अष्टमी तिथि प्रारम्भ – 29 अगस्त 2021 को 11:25 PM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – 31 अगस्त 2021 को 01:59 AM बजे
रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ – 30 अगस्त 2021 को 06:39 AM बजे
रोहिणी नक्षत्र समाप्त – 31 अगस्त 2021 को 09:44 AM बजे 

जन्माष्टमी का इतिहास   

कंस एक बहुत ही दुराचारी राजा था. वह अपनी प्रजा पर अत्याचार करता था. लेकिन अपनी बहन देवकी से बहुत स्नेह करता था. कंस ने देवकी का विवाह यदुवंशी राजकुमार वसुदेव से कर दिया. विवाह के बाद यह आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का संहार करेगी. यह सुनकर कंस ने बहन को मारने के लिए तलवार निकाल ली. वसुदेव ने उसे शांत किया और वादा किया कि वे अपने सारे पुत्र उसे सौंप दिया करेंगे. 

कंस ने दोनों को कैद कर लिया और कारागार में डाल दिया. देवकी ने एक के बाद एक 7 संतानों को जन्म दिया और कंस ने उन सभी की हत्या कर दी. 7वें गर्भ में श्रीहरि के अंशरूप श्रीशेष (अनंत) ने प्रवेश किया था. कंस उसे भी मार डालेगा, ऐसा सोचकर भगवान ने योगमाया से देवकी का गर्भ ब्रजनिवासिनी वसुदेव की पत्नी रोहिणी के उदर में रखवा दिया. देवकी का गर्भपात हो गया. 

8वें पुत्र के रूप में श्रीहरि ने जन्म लिया. यह अवतार उन्होंने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात में लिया था. इसलिए तभी से इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा. 

जन्माष्टमी पर्व का महत्व: इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं। भजन-कीर्तन करते हैं। विधिपूर्वक कृष्ण भगवान की पूजा अर्चना की जाती है। कृष्ण भगवान के जन्म की कथा सुनी जाती है। लोग अपने घरों को सजाते हैं। इस दिन कृष्ण जी के मंदिरों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। कई जगह कृष्ण जी की लीलाओं का प्रदर्शन भी किया जाता है। क्योंकि भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए रात में ही भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को नहलाया जाता है और उन्हें नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इस दिन बाल गोपाल को पालने में झुलाने की भी परंपरा है। 

मनोकामना पूर्ति के लिए कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा में इन मंत्रों का करें जाप: 

भगवान कृष्ण का मूल मंत्र
‘कृं कृष्णाय नमः’ 

धन-धान्य में वृद्धि करने वाला मंत्र
क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः 

मनोवाछिंत फल की प्राप्ति के लिए मन्त्र
‘ॐ नमो भगवते नन्दपुत्राय आनन्दवपुषे गोपीजनवल्लभाय स्वाहा’
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः