Blog

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की

हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर चारों तरफ उत्साह बना हुआ है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जन्‍मदिन की तैयारियां पूरे देश में चल रही हैं। इस बार श्रीकृष्‍ण की 5247वीं जयंती है।  ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र को आधी रात में ठीक 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। 

स्मार्त और वैष्णव

कृष्ण जन्माष्टमी इस बार 11 और 12 अगस्त को दोनों दिन पड़ रही है। शैव (स्मार्त) मत को मानने वाले लोगों के लिए 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने का मुहूर्त है तो वैष्णव मत से 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

स्मार्त और वैष्णव का भेद 

स्मार्त : वेद,  श्रुति- स्मृति  आदि  ग्रंथो को मानने वाले धर्म परायण प्रायः सभी गृहस्थी लोग स्मार्त कहलाते हैं। 

वैष्णव :  वे धर्म परायण लोग जिन्होंने किसी प्रतिष्ठित वैष्णव सम्प्रदाय के गुरु से दीक्षा ग्रहण की हो, गले में श्री गुरु द्वारा दी गई कंठी धारण की गई हो तथा मस्तक एवं गले पर श्री खंड, चंदन या विष्णु चरण का तिलक, त्रिपुण्ड, आदि के चिन्ह धारण किए हुए एवं विशिष्ट संप्रदाय से सम्बंधित भक्तजन वैष्णव कहलाते हैं। 

 2020 में जन्माष्टमी , 11 अगस्त या 12 अगस्त 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हर साल रक्षा बंधन के बाद मनाई जाती है। हर साल की तरह इस बार भी यह असमंजस हो गया है। दरअसल, इस बार कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी  दो दिन यानी कि 11 और 12 अगस्‍त को पड़ रही है। एक बात यहां समझने की है कि हिंदू धर्म में दो तरह की तिथि को लोग मानते है कुछ लोग उदया तिथी को मानते है और उसके अनुसार व्रत करते हैं। दूसरी तरफ कुछ लोग उदया तिथि को नहीं मानते हैं।निर्णय सिंधु के अनुसार अष्टमी व्यापिनी तिथि में ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना शास्त्र सम्मत है। ऐसे में 11 अगस्‍त को जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ है।

जन्माष्टमी समय

11 अगस्त, 2020 ( अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी) मंगलवार 09.07 बजे अष्टमी प्रारंभ 
12 अगस्त, 2020 ( उदय कालिक अष्टमी) बुधवार 11 बजकर 17 मिनट पर समाप्त, तदुपरांत अर्धरात्रि व्यापिनी नवमी तिथि 
12 अगस्त, 2020 रात का मुहूर्त 12.05 बजे से 12.48 बजे तक 
मुहूर्त की अवधि: 43 मिनट 
वैष्णव जन्माष्टमी के लिए 12 अगस्त का शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है। बुधवार की रात बाल-गोपाल की पूजा-अर्चना की जा सकती है। 
मतानुसार 11 अगस्त मंगलवार के दिन ही कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत, चंद्रमा को अर्घ्य दान, जागरण, कीर्तन तथा कृष्ण जन्म से सम्बंध अन्य सभी पूजन कार्य करने शास्त्र सम्मत होंगे। 

जन्माष्टमी का इतिहास  

कंस एक बहुत ही दुराचारी राजा था. वह अपनी प्रजा पर अत्याचार करता था. लेकिन अपनी बहन देवकी से बहुत स्नेह करता था. कंस ने देवकी का विवाह यदुवंशी राजकुमार वसुदेव से कर दिया. विवाह के बाद यह आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का संहार करेगी. यह सुनकर कंस ने बहन को मारने के लिए तलवार निकाल ली. वसुदेव ने उसे शांत किया और वादा किया कि वे अपने सारे पुत्र उसे सौंप दिया करेंगे.

कंस ने दोनों को कैद कर लिया और कारागार में डाल दिया. देवकी ने एक के बाद एक 7 संतानों को जन्म दिया और कंस ने उन सभी की हत्या कर दी. 7वें गर्भ में श्रीहरि के अंशरूप श्रीशेष (अनंत) ने प्रवेश किया था. कंस उसे भी मार डालेगा, ऐसा सोचकर भगवान ने योगमाया से देवकी का गर्भ ब्रजनिवासिनी वसुदेव की पत्नी रोहिणी के उदर में रखवा दिया. देवकी का गर्भपात हो गया.

8वें पुत्र के रूप में श्रीहरि ने जन्म लिया. यह अवतार उन्होंने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात में लिया था. इसलिए तभी से इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा.