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OM is the beginning and end of the world. OM is the eternal sound of this universe. Even when there was nothing, there was the sound of OM (Scientist already proved that). Sun always generates the sound of OM. There are several physical and materialistic benefits of practicing OM.

OM is not a word and OM is not a letter as well. Explaining OM needs a great level of clarity. However, i am trying to explain a bit about it here. Please read.

"ॐ" केवल एक पवित्र ध्वनि ही नहीं, अपितु अनंत शक्ति का
प्रतीक है। ॐ अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व
विदित है । अ उ म् । "अ" का अर्थ है आर्विभाव या उत्पन्न होना ,
"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, "म" का मतलब है
मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना । ॐ सम्पूर्ण
ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है ।

If you notice the sound vibration of different parts of OM (A, U and M), you will see how it crawls in our body internally.

Try the followings:

  1. Put your palm on your chest, and say ..."अ", you will feel a vibration on your chest.
  2. Put your palm on your throat, and say ..."उ", you will feel a vibration on your throat.
  3. Put your palm on your upper head & keep your lips closed and say..."म", you will feel a strong vibration all inside your head.

So if you are pronouncing OM properly and practicing it quite often, you will start feeling the great magic and peace inside you. Lets start a Happy Journey :)

Few of the other Advantages of OM, are as follows:

OM as Explained in Mandukya Puran:

Mandukya Upanishad (the four levels of the syllable Om)

The past,the present, and the future--all that is simply Om; and whatever else that is beyond the three times, that also is simply Om. 

It is consisting of four quarters. The quarters are the constituent phonemes,namely "a," "u," and "m."

First Level is Waking

The first constituent phoneme--"a"--is Vaishvanara situated in the waking state, so designated either because of obtaining (apti) or because of being first (adimattva). Anyone who knows this is sure to obtain all his desires and becomethe first. 

Second Level is Dreaming

The second constituent phoneme--"u"--is Taijasa situated in the state of dream, so designated either because of heightening (utkarsha) or because of being intermediate (ubhayatva). Anyone who knows this is sure to heighten the continuity of knowledge and to become common; and a man without the knowledge of brahman will not be born in his lineage.

Third Level is Sleeping

The third constituent phoneme--"m" is Prajna situated in the state of deep sleep,so designated either because of construction or because of destruction. Anyone who knows this is sure to construct this whole world and to become also its destruction.

Forth Level is "Entering into Self"

The fourth, on the other hand, is without constituent phonemes; beyond the reach of ordinary transaction; the cessation of the visible world; auspicious; and unique.Accordingly, the very self (atman) is Om. Anyone who knows this enters the self (atman) by himself (atman).

 

Materialistic Advantage

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ॐ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों का प्रदायक है ।
मात्र ॐ का जप कर कई साधकों ने अपने उद्देश्य की प्राप्ति कर
ली। कोशीतकी ऋषि निस्संतान थे, संतान प्राप्तिके लिए
उन्होंने सूर्यका ध्यान कर ॐ का जाप किया तो उन्हे पुत्र
प्राप्ति हो गई । गोपथ ब्राह्मण ग्रन्थ में उल्लेख है कि जो "कुश" के
आसन पर पूर्व की ओर मुख कर एक हज़ार बार ॐ रूपी मंत्र का जाप
करता है, उसके सब कार्य सिद्ध हो जाते हैं।
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How to Pronounce OM

उच्चारण की विधि : प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि
का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन,
सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21
बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-
धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

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Health Benefits of OM

ॐ के उच्चारण से शारीरिक लाभ -
1. अनेक बार ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो
जाता है।
2. अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण
से उत्तम कुछ भी नहीं।
3. यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के
कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।
4. यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।
5. इससे पाचन शक्ति तेज़ होती है।
6. इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता
है।
7. थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।
8. नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है।
रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चित नींद
आएगी।
9. कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती
आती है।
10. ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन
कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़
जाती है।
11. ॐ के दूसरे शब्द का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है
जो कि थायरायड ग्रंथी पर प्रभाव डालता है।

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