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हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। 
भगवत पुराण के अनुसार सालभर में चार नवरात्रि आती है, जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और दो सार्वजनिक रूप से मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है ।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष शुरू होता है। हिंदू नववर्ष यानी नया संवत्सर 2079, 2 अप्रैल से शुरू होगा ।
नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। शास्त्रों में नौ दिनों की नवरात्रि को बेहद शुभ माना गया है। इस साल माता रानी घोड़े पर सवार होकर आएंगी। 

1. पहले दिन 2 अप्रैल 2022 को प्रतिपदा के दिन माता माँ शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना होगी। 
2. दूसरे दिन 3 अप्रैल को द्वितीया तिथि पर माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी। 
3. तीसरे दिन 4 अप्रैल को तृतीया तिथि पर माँ चंद्रघंटा की पूजा होगी। 
4. चौथे दिन 5 अप्रैल को चतुर्थी तिथि पर माँ कुष्मांडा की पूजा होगी। 
5. पांचवें दिन 6 अप्रैल को पंचमी तिथि पर माँ स्कंदमाता की पूजा होगी। 
6. छठे दिन 7 अप्रैल को षष्ठी तिथि पर माँ कात्यायनी की पूजा पूजा होगी।
7. सातवें दिन 8 अप्रैल को सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि की पूजा होगी।
8. आठवें दिन 9 अप्रैल को अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी की पूजा होगी। 
9. नौवें दिन 10 अप्रैल को नवमी तिथि रामनवमी पर माँ सिद्धिदात्री की पूजा होगी। 
10. दसवें दिन 11 अप्रैल को दशमी तिथि पर नवरात्रि का पारणा होगा। 

घटस्थापना / कलश का समय 

6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा 

अभिजीत मुहूर्त 

12 बजे  से  लेकर 12 बजकर 50 मिनट तक 

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 01, 2022 को 11 बजकर 53 मिनट से शुरू
प्रतिपदा तिथि समाप्त - अप्रैल 02, 2022 को 11 बजकर 58 मिनट तक 

दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी के 108 नाम पढ़ना लाभकारी रहेगा या देवी के मंत्र जाप भी कर सकते हैं 

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
ॐ दुं दुर्गायै नम: