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कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है।  

धन्वन्तरि जी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की भी परम्परा है। चूंकि भगवान धन्वन्तरि चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए भी प्रार्थना की जाती है ।

और इस खरीदे हुए बर्तन में यदि किसी रोगी को पानी दिया जाए तो वह रोगी जल्दी निरोगी होता है ।

यम दीपम

धनतेरस को शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है।  

इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है ।

धनत्रयोदशी

इस दिन लक्ष्मी जी के साथ कुबेर यंत्र की भी स्थापित कर उनका पूजन करना चाहिए ।

 

धनतेरस पूजा मुहूर्त ( सायं काल)

 

- 06:17 PM to 08:11 PM

 

यम दीपम शनिवार, नवंबर 2 , 2021 को

 

प्रदोष काल - 05:35 PM to 08:11 PM

 

वृषभ काल - 06:17 PM to 08:12 PM

 

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ - 11:31 AM on Nov 02, 2021

 

त्रयोदशी तिथि समाप्त - 09:02 AM on Nov 03, 2021